Thursday, December 09, 2010





पंख अगर होते मेरे पास
रंगों में भर देता पलाश
शब्दों में भर देता उल्लास
नया पैगाम, नई अभिलाष
पंख अगर होते मेरे पास
दूरी है, मजुबरी है, नहीं हूँ हताश
बिरह में, मिलन का एहसास
उमंग है, तरंग है, मन में है बिश्वास
उड़ आऊंगा, अंतहीन हो चाहे आकाश
पंख अगर होते मेरे पास
शब्द नहीं, व्यक्त हैं बिरह का प्रकाश
कविता नहीं, छंदों में है भावों का विकाश 
मन उपवन सा, मरुस्थल सा वास
साथ नहीं, फिर भी साथ होने की आश
पंख अगर होते मेरे पास

1 comment:

R K Garg said...

good one buddy.