हट के
चाह बस अब सबकी एक ही है, लगना है हट के, गिरते पड़ते, लड़ते झगड़ते, भूले या भटके,
समुंदर में बहते, आसमान में उड़ते या पहाड़ो में लटके,
चाह बस अब सबकी एक ही है, लगना है हट के . . .
जो सब करते हैं, हम वह कर नहीं सकते,
जिन गीतो पर दुनिया नाचती, उन पर हम्हारे पांव नहीं थिरकते,
जो जगह सबको आती पसंद , हम वहां नहीं जाते,
लोकप्रिय लेखक और कलाकार हमे रास नहीं आते . . .
फीका रंग हमें CUTE लगता और चटकीला कुछ लगता COMMON,
जकूज़ी में डूबकर हम सुकून धुंडते और पूजा पाठ को कहते पागलपन,
जब सड़कों पर बच्चे भूके मरते, हम १४११ बाघों की चिंता करते,
ट्रैफिक पुलिस को हम घूस देते, पर समलैंगिक अधिकार के लिए लड़ते . . .
पिताजी जी को पा, भाई को bro, और मित्रों को हम dude बुलाते,
जन्माष्टमी की हमें खबर नहीं, पूरा दिसम्बर हम Santa के गुण गाते,
चम्मच से हम चावल खाते, और INDIANs को कहते CHEAP PEOPLE,
भिकारी देख खिड़की चढाते, और JAI HO सुन खोलते CHAMPAGNE BOTTLE . . .
चाह बस अब सबकी एक ही है, लगना है हट के,
छोटी छोटी खुशियों को भूल, किसी जटिल सोच में अटके,
छोटी छोटी खुशियों को भूल, किसी जटिल सोच में अटके,
खुद से लड़के, लोगों से छुपके, एक अकेलेपन में फसके,
चाह बस अब सबकी एक ही है, लगना है हट के . . .
Sanket

2 comments:
आज पढ़कर तुम्हारी कविता मेरे अन्दर का भी कवी जागा
लिखते जा जो भी है आज तेरे दिल में तुझको किसने है रोका
बचपन की यादें है सबसे सुहानी
माँ का प्यार दादी की वो कहानी
पापा की बात कभी ना मानी
बारिश की बूंदे हवा का झोका
लिखते जा जो भी है आज तेरे दिल में तुझको किसने है रोका
दुनिया बनाने वाला दुनिया से ही हरा
जो अपनी तकदीर खुद्द बनाये उनका है बोलबाला
हमको फ़िक्र नहीं कल की साथ जब है उपरवाला
मंजिल दूर है कठिन है रास्ता
लिखते जा जो भी है आज तेरे दिल में तुझको किसने है रोका
kyaa baat kyaa baat.....ekdum sahi likha hai dost....bindasss
Post a Comment